Saturday, July 11, 2020

दुनिया में (छोटे तरीकों से) आप कैसे परिवर्तन देखना चाहते हैं



 मेरा एक बड़ा दोस्त, एक शाम जब उसके बच्चे बिस्तर पर चले गए थे, तो उसने अपनी योजना में वह बदलाव किया जो वह दुनिया में देखना चाहता था।  वह आइसक्रीम का कटोरा पकड़े अपने बेडरूम में चला गया।  फिर उसने उसे कटोरा सौंप दिया और उसे एक धीमी, गहरी मालिश दी और उसे बताया कि वह कितनी अद्भुत और सुंदर थी।

 जब उसने पूछा कि वह क्या कर रही है तो उसने कहा कि वह वह बदलाव है जो वह दुनिया में देखना चाहता था।  बहुत बार हम लोगों से अपेक्षा करते हैं कि वे जानें कि हमें अपने जीवन में उनसे क्या चाहिए और क्या चाहिए।

हम बस उम्मीद करते हैं कि हमारे समुदाय उन आशाओं और सपनों में खिलें जो हमने अपने सिर में समेटे हैं।  लेकिन अगर हम अपने आस-पास की चीजों को बदलते देखना चाहते हैं तो हमें सबसे पहले इसका उदाहरण बनना चाहिए।  अगर हम दुनिया को बदलते देखना चाहते हैं तो हमें पहले खुद को बदलना होगा।

 दुनिया में (छोटे तरीकों से) आप कैसे परिवर्तन देखना चाहते हैं

 ज्यादातर लोगों को एक उदाहरण देखने की जरूरत है

 पिछले साल क्रिसमस के लिए, मेरी बच्ची की बहन ने मुझे एक झूला दिया।  चूंकि मैं हमेशा इस कदम पर हूं लेकिन रुकना और आराम करना सीखना चाहता हूं, मैंने सोचा कि यह एक शानदार उपहार था।  दुर्भाग्य से, मैं अपने पिछले यार्ड में दो पेड़ों पर इसे लटकाने के लिए हाल तक पर्याप्त रूप से धीमा नहीं हुआ !

निर्णय वास्तव में मेरे पास आया था जब मैं ऐसा करने जा रहा था।  मैं इतना उत्साहित था कि मैं शायद ही सो सका।  मैंने झूला और दो पट्टियाँ इकट्ठा कीं जिन्हें पेड़ पर जाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।


पट्टियां काफी सरल लग रही थीं और चूंकि वे बिना किसी दिशा के साथ आए थे, इसलिए मैंने माना कि यह आसान होगा।  मेरे हाथ में पहली पट्टा के साथ पेड़ के सामने खड़े होकर मुझे अचानक पता चला कि मैं ऐसा करने के बारे में स्पष्ट था।  जिस तरह से मैंने सोचा था कि यह काम करेगा बस किसी भी वजन को पकड़ नहीं रहा था।

 मेरे सिर को खरोंचते हुए, मैंने पट्टियों की जांच की और दिशाओं की तलाश की।  तब मुझे लगा कि शायद झूला पर ही कुछ छपा था।  जब वे सभी रास्ते कम पड़ गए तो मैं थोड़ा निराश हो गया।  बस जब मैं Google को सबमिट करने के लिए तैयार था और कुछ दिशाएँ देख रहा था तो मेरे ससुर आ गए।

बड़ी विनम्रता के साथ, मैंने उल्लेख किया कि शायद वह मुझसे ज्यादा चालाक था और मुझे यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि इन पट्टियों को कैसे करना है।  दस सेकंड से भी कम समय में उन्होंने पेड़ के चारों ओर पट्टा खोल दिया था और इसे नीचे कस दिया था।

 जब मैंने देखा कि उसने यह कैसे किया तो मैं चौंक गया कि यह कितना सरल है।  बेशक, यह है कि यह कैसे किया जाता है।  मैं उस झूला का उपयोग तब तक कर सकूंगा जब तक मैं जीवित हूं क्योंकि अब मुझे पता है कि उन पट्टियों को कैसे करना है।  लेकिन मुझे उदाहरण से सीखना था।

 यह आज भी कई लोगों के लिए सच है।  हम एक अच्छे माता-पिता होने पर सभी प्रकार की पुस्तकों को पढ़ सकते हैं, लेकिन एक उदाहरण आपको और आगे ले जा सकता है।  किसी ने एक बार मुझे समझाने की कोशिश की कि कंप्यूटर को कैसे ठीक किया जाए;  मैं स्पष्टीकरण कुछ भी नहीं कर सका।  हालांकि, एक बार जब वह आया और उसने मुझे दिखाया कि उसका मतलब क्या था, यह सरल था।


यह सही है कि कैसे एक नेता बनना है, कैसे विरोध करना है या नहीं करना है या हमारे जीवन को कैसे जीना है।  दुर्भाग्य से, हमें अक्सर ऐसे लोगों को खोजने के बारे में विचार करने की आवश्यकता होती है जो हमारे उदाहरण हो सकते हैं।  हम एक गलती करते हैं अगर हम चाहते हैं कि एक व्यक्ति हमारे जीवन में सभी बिंदुओं के लिए एक उदाहरण हो।


कोई एक महान एथलीट हो सकता है और अगर मैं एक महान एथलीट बनना चाहता हूं तो मुझे उनकी एथलेटिक चीजें करनी चाहिए।  इसका मतलब यह नहीं है कि मुझे उन्हें अपने बच्चों की परवरिश के लिए या पत्नी के प्रति वफादार रहने के लिए एक मॉडल के रूप में उपयोग करना चाहिए।  किसी से पूरी मिसाल की उम्मीद करना गलत है।  उठाओ और अपने उदाहरण बुद्धिमानी से चुनें और आप तेजी से आगे बढ़ेंगे

अधिकांश लोगों को संभावनाओं को देखने की जरूरत है

 हममें से अधिकांश लोग अपने जीवन पर प्राकृतिक सीमाएं लगाते हैं।  जितनी बार मैं गिन सकता हूं, उससे अधिक बार मैंने सुना है, "यह सिर्फ मैं हूं जो इसे बदल नहीं सकता है।"  वो एक झूठ है।  जब हम संभावनाओं को देखते हैं और सपने देखना शुरू करते हैं तो हमें नए सपने बनाने का अवसर मिलता है।

मुझे इसका उल्लेख करने से नफरत है क्योंकि इसे मैदान में पीटा गया था लेकिन चार मिनट का मील एक बार सबसे तेज़ था जिसे एक आदमी चलाने की उम्मीद कर सकता था।  एक बार वह अवरोध टूट गया तो हर कोई उसे कर सकता था।  सभी नवाचारों के लिए भी यही सच है।

आज हम तेजी से संवाद करते हैं क्योंकि बेल और एडिसन ने टेलीफोन और चलती तस्वीरें बनाईं।  अधिकांश का मानना ​​था कि ऐसा नहीं किया जा सकता है।  उन्होंने वह परिवर्तन पैदा किया, जिसे वे देखने का सपना देखते थे।  एक बार अन्य लोगों ने इस संभावना को देखा कि उन्होंने इस पर विस्तार किया और हमारे पास आधुनिक इंटरनेट और नए शैक्षिक उपकरण हैं जो पूरी दुनिया को छू रहे हैं।

पहले से कम सीमाएं हैं।  आज हमें नए इनोवेटर्स की ज़रूरत है कि वे नई चीज़ों को आज़माएँ या पुरानी चीज़ों को नए तरीकों से आज़माएँ या अपनी प्राकृतिक कल्पनाओं से परे कुछ आज़माएँ ताकि हम वो बदलाव बन सकें जिसे हम दुनिया में देखना चाहते हैं।

त्वरित अभ्यास: अगली बार जब आप किसी भी तरह की परियोजना कर रहे हों और आपको लगता है, "काश ऐसा करने का एक सरल तरीका होता," या शायद "काश वहाँ एक उपकरण होता जो कि बेहतर होता," इसे लिखें । इसे अपने पसंदीदा सोशल मीडिया पर शेयर करें और इसे पोस्ट करते रहें। ऐसा करने में आप अगले महान नवाचार को खिला सकते हैं और अपने जीवन को आसान बना सकते हैं।

अधिकांश लोगों को कुछ नया करने के लिए एक बहाना चाहिए। लोग वास्तव में चीजों को अलग करना चाहते हैं, लेकिन वे भी चीजों को बदलना नहीं चाहते हैं। इंसान तो जैसे अजीब होते हैं। हमें कुछ परिवर्तन करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है जो हम घटित देखना चाहते हैं। शायद आप वह प्रेरणा हो सकते हैं।


अपनी पहली मैराथन के दौरान, मैं एक बेहद अधिक वजन वाले व्यक्ति से प्रेरित था, जो दौड़ लगा रहा था।  इसने मुझे तेजी से भागने का बहाना दिया या शिकायत करने के बहाने ले गया।  हममें से ज्यादातर लोग बदलाव से नफरत करते हैं इसलिए हमें प्रेरणा की जरूरत है।

 वास्तव में, हमने हमेशा महसूस नहीं किया कि हमने किसे प्रभावित या प्रोत्साहित किया है।  दस साल पहले मैंने एक युवा महिला के साथ उन सभी संभावनाओं के बारे में गर्मजोशी से बातचीत की, जो मैंने उसमें देखीं।  उसने असहमति जताई और मांग की कि मैं जीवन के असफलता के बहाने उसे स्वीकार करता हूं।  उसने मुझे अपनी बात साबित करने के लिए एक चिकित्सक का नोट, चिकित्सक के पत्र और रिपोर्ट कार्ड दिखाए।

 मैंने उसे बताया कि वे स्मार्ट लोग थे, लेकिन वह उन सभी की तुलना में अधिक थी। इससे पहले कि वह किया गया था वह एक आवेश में छोड़ दिया और मैं तीन साल से उसके बारे में नहीं सुना। जब मैंने किया वह उत्कृष्ट था और महान कर रहा था। वह दिखाने और मुझे बताने के लिए रुक गई कि मैं सही था। बहाना है कि लोगों की जरूरत है, कठिन हो। \ N \ n दुनिया को पहले कभी नहीं की तरह भावुक, बुद्धिमान और आशावादी नेताओं की जरूरत है। वे नेता जो न केवल जानते हैं कि उन्हें क्या करना है, बल्कि यह भी जानते हैं कि लोगों को कैसे दिखाना है कि दुनिया को किस तरह की जरूरत है। क्या आप परिवर्तन होंगे?



Friday, July 10, 2020

प्रताप एक विलक्षण प्रतिभा

प्रतिभा प्रलाप नहीं करती,प्रयास करती है..🙏🙏

           22 वर्षीय युवा एक माह में 28 दिन विदेश यात्रा करता हैं। फ्रांस ने उसे अपने यहां नौकरी करने के लिए आमंत्रित किया, जिसमें उसे 16,00,000(सोलह लाख) रुपए प्रतिमाह वेतन, 5 बीएचके मकान और ढाई करोड़ की कार देने का प्रस्ताव दिया गया।

           परंतु उसने यह बड़ी ही विनम्रता से अस्वीकार कर दिया ,क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (#DRDO) को उसका संविलियन करने के आदेश दे दिए गए थे ।

आइए, वह बालक कौन है इसके बारे में हम जानें-


      🔸    मैसूर कर्नाटक के निकट दूरस्थ ग्रामीण अंचल में कदईकड़ी में जन्मा बालक‌ । पिता कृषक ।पिता की आय महज 2000 रुपये मासिक।
बचपन से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रति रुचि। प्राथमिक कक्षा से ही निकट के साइबरकेफे में जाता और दुनिया भर की एविएशन स्पेस  वेबसाइट में डूबा रहता। टूटी फूटी भाषा में वैज्ञानिकों को  ई मेल भेजता।

      🔸    वह इंजीनियरिंग करना चाहता था पर आर्थिक स्थिति दयनीय होने के कारण बीएससी भौतिक करना पड़ा। छात्रावास शुल्क अदा न करने के कारण उसे वहां से निकाला गया। वह मैसूर बस स्टैंड पर सोता और सार्वजनिक टॉयलेट का उपयोग करता। 


        🔸  उसने अपनी मेहनत से कंप्यूटर लैंग्वेज का ज्ञान प्राप्त किया और ई वेस्ट के माध्यम से ड्रोन बनाना सिखा। अभी तक 600 से ज्यादा ड्रोन बना चुके इस बालक को पहला ड्रोन बनाने के लिए 80 बार प्रयत्न करना पड़ा।

       🔸     #आईआईटी दिल्ली में ड्रोन प्रतियोगिता में भाग लेने ट्रेन के जनरल क्लास में गया और द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

        🔸   जापान में आयोजित विश्व ड्रोन प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उसे अपनी थीसिस चेन्नई के प्रोफ़ेसर से अनुमोदित कराना पड़ा, जिसे यह लिखने में दक्ष नहीं है टिप्पणी के साथ अनुमोदित कर दिया गया।
      🔸      जापान जाने के लिए ₹60000 रुपयों की जरूरत थी, जिसे मैसूर के एक व्यक्ति द्वारा उसके फ्लाइट टिकट स्पॉन्सर किए गए। ऊपरी खर्च के लिए उसने अपनी मां का मंगलसूत्र बेचकर व्यवस्था की। जब वह जापान उतरा तो उसकी जेब में मात्र 14 सौ रुपए थे।

       🔸     आयोजन स्थल तक जाने के लिए मंहगी बुलेट ट्रेन से टिकट ले पाना संभव नहीं था। 16 स्थानों पर लोकल ट्रेन बदलते बदलते और अंत के 8 किलोमीटर पैदल चलते हुए वह आयोजन स्थल पर पहुंचा जहां 127 देशों के प्रतियोगी भाग ले रहे थे।
जब परिणाम घोषित किया जा रहा था तो उसमें टॉप टेन के 10 वें  नंबर से 2 तक उसका नाम नहीं आया तो वह निराश होकर वापस हो रहा था...

       🔸   ..तभी जज ने घोषित किया  #प्रताप गोल्ड मेडलिस्ट भारत* । वह खुशी से उछल पड़ा। उसने अपनी आंखों से यूएसए का ध्वज नीचे उतरते और भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा ऊपर जाते हुए देखा। पुरस्कार स्वरुप उसे 10,000 डॉलर प्रदान किए गए।

       🔸   भारतीय प्रधानमंत्री और कर्नाटक के विधायक और सांसदों ने भी उसे बधाइयां दी। आज यह प्रतिभाशाली बालक रक्षा अनुसंधान और रक्षा विकास संगठन में वैज्ञानिक के पद पर सेवारत है। यह और कोई नहीं अपने नाम के अनुरूप प्रताप दिखाने वाला प्रताप ही है। जी हां प्रताप।

*❤️ प्रतिभा प्रलाप नहीं करती,प्रयास करती है और प्रतिष्ठा अर्जित करती है। पैसा जरुरी है पर Passion उससे भी ज्यादा जरुरी।* 

साभार -
🙏🙏🙏🙏🙏

Wednesday, July 8, 2020

Theft conviction

When Zen Master Bankei set up a camp to teach meditation, many children from all over Japan came to learn from him.  During the camp itself, one day a student was caught stealing.  Bankei was told this, the rest of the students requested that this student be removed from the camp as punishment for theft.

 But Bankei did not pay attention to it and allowed him to study with more children.

 This happened again a few days later, the same student was caught stealing again.  Once again he was taken in front of Bankei, but this time also he did not punish the student against the expectations of all.

 Due to this, the other children became angry and all together wrote a letter to Bankei that if that student is not removed then we will all leave the camp and leave.

 Bankei read the letter and immediately asked all the students to gather.  . "  You are all intelligent. "  Bankei began to say, "You know what is right and what is wrong."  If you want to go somewhere else, you can go, but this poor person does not even know what is right and what is wrong.  If I do not teach it, who else will teach it?  Even if you all go away, I will teach it here. "

 Hearing this, the stealing student burst into tears.  Now the desire to steal from him was gone forever.

चोरी की सजा

जब  ज़ेन  मास्टर  बनकेइ  ने  ध्यान करना  सिखाने   का  कैंप  लगाया  तो  पूरे  जापान  से  कई  बच्चे  उनसे  सीखने  आये .  कैंप  के  दौरान  ही  एक  दिन  किसी  छात्र  को  चोरी  करते  हुए  पकड़  लिया  गया . बनकेइ  को  ये  बात  बताई  गयी  , बाकी  छात्रों   ने  अनुरोध  किया  की  चोरी  की  सजा  के  रूप में इस  छात्र   को  कैंप  से  निकाल  दिया  जाए .


पर  बनकेइ  ने  इस  पर  ध्यान  नहीं  दिया  और  उसे  और  बच्चों  के  साथ  पढने  दिया .

कुछ  दिनों  बाद  फिर  ऐसा  ही  हुआ , वही  छात्र  दुबारा  चोरी  करते  हुए  पकड़ा  गया .  एक  बार  फिर  उसे  बनकेइ  के  सामने  ले  जाया  गया , पर  सभी   की  उम्मीदों  के  विरूद्ध  इस  बार  भी  उन्होंने  छात्र  को  कोई  सजा  नहीं  सुनाई .

इस  वजह  से  अन्य  बच्चे  क्रोधित  हो  उठे  और  सभी  ने  मिलकर  बनकेइ  को  पत्र  लिखा की  यदि  उस  छात्र  को  नहीं  निकाला  जायेगा  तो  हम  सब  कैंप  छोड़  कर  चले  जायेंगे .


बनकेइ  ने  पत्र  पढ़ा  और  तुरंत  ही  सभी  छात्रों  को  इकठ्ठा  होने  के  लिए  कहा . .” आप  सभी  बुद्धिमान  हैं .” बनकेइ  ने  बोलना  शुरू  किया ,“ आप  जानते  हैं  की  क्या  सही  है  और  क्या  गलत . यदि  आप  कहीं  और  पढने  जाना  चाहते  हैं  तो  जा  सकते  हैं  , पर  ये  बेचारा  यह  भी  नहीं  जानता  की  क्या  सही  है  और  क्या  गलत . यदि  इसे  मैं  नहीं  पढ़ाऊंगा   तो  और  कौन  पढ़ायेगा ?  आप  सभी  चले  भी  जाएं  तो  भी  मैं  इसे  यहाँ  पढ़ाऊंगा .”

यह  सुनकर  चोरी  करने  वाला  छात्र  फूट -फूट कर  रोने  लगा  . अब  उसके  अन्दर  से  चोरी  करने की   इच्छा  हमेशा  के  लिए  जा  चुकी  थी .

द्रोपदी और उसका बदला

18 दिन के युद्ध ने, 
द्रोपदी की उम्र को 
80 वर्ष जैसा कर दिया था..

 शारीरिक रूप से भी 
और मानसिक रूप से भी

शहर में चारों तरफ़
 विधवाओं का बाहुल्य था.. 

 पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था 

अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और, 
उन सबकी वह महारानी
 द्रौपदी 
हस्तिनापुर के महल में
 निश्चेष्ट बैठी हुई 
शून्य को ताक रही थी । 

तभी, 
"श्रीकृष्ण" 
कक्ष में दाखिल होते हैं
द्रौपदी 
कृष्ण को देखते ही 
दौड़कर उनसे लिपट जाती है ... 
कृष्ण उसके सिर को सहलाते रहते हैं और रोने देते हैं 

थोड़ी देर में, 
उसे खुद से अलग करके
 समीप के पलंग पर बिठा देते हैं । 

द्रोपदी" : यह क्या हो गया सखा ??
ऐसा तो मैंने नहीं सोचा था ।

"कृष्ण" : नियति बहुत क्रूर होती है पांचाली..
वह हमारे सोचने के अनुरूप नहीं चलती !

हमारे कर्मों को 
परिणामों में बदल देती है..

तुम प्रतिशोध लेना चाहती थी और, तुम सफल हुई, द्रौपदी ! 

तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हुआ... सिर्फ दुर्योधन और दुशासन ही नहीं, 
सारे कौरव समाप्त हो गए 

तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए ! 

"द्रोपदी" : सखा, 
तुम मेरे घावों को सहलाने आए हो या, 
उन पर नमक छिड़कने के लिए ?

"कृष्ण" : नहीं द्रौपदी, 
मैं तो तुम्हें वास्तविकता से अवगत कराने के लिए आया हूँ
हमारे कर्मों के परिणाम को
 हम, दूर तक नहीं देख पाते हैं और जब वे समक्ष होते हैं.. तो, हमारे हाथ मे कुछ नहीं रहता ।

"द्रोपदी" : तो क्या, 
इस युद्ध के लिए पूर्ण रूप से मैं ही उत्तरदाई हूँ कृष्ण ? 

"कृष्ण" : नहीं द्रौपदी 
तुम स्वयं को इतना महत्वपूर्ण मत समझो...
लेकिन, 
तुम अपने कर्मों में थोड़ी सी भी दूरदर्शिता रखती
 तो, स्वयं इतना कष्ट कभी नहीं पाती।

"द्रोपदी" : मैं क्या कर सकती थी कृष्ण ?

"कृष्ण" :- जब तुम्हारा स्वयंवर हुआ... 
तब तुम कर्ण को अपमानित नहीं करती 

और उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का 
एक अवसर देती 
तो, शायद परिणाम 
कुछ और होते ! 

👉इसके बाद जब कुंती ने तुम्हें पाँच पतियों की पत्नी बनने का आदेश दिया...
तब तुम उसे स्वीकार नहीं करती 
तो भी, परिणाम कुछ और होते । 
             और 
👉उसके बाद 
तुमने अपने महल में दुर्योधन को अपमानित किया... 
वह नहीं करती 
तो, तुम्हारा चीर हरण नहीं होता... 
तब भी शायद, परिस्थितियाँ कुछ और होती । 

हमारे  "शब्द" भी 
हमारे "कर्म" होते हैं द्रोपदी...

और, हमें 
अपने हर शब्द को बोलने से पहले 
तोलना बहुत ज़रूरी होता है...
 अन्यथा, 
उसके "दुष्परिणाम" सिर्फ़ स्वयं को ही नहीं... 
अपने पूरे परिवेश को दुखी करते रहते हैं ।

संसार में केवल मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है...
 जिसका 
"ज़हर" 
उसके 
"दाँतों" में नहीं, 
"शब्दों " में है...

💟     💟     💟     💟
 
इसलिए शब्दों का प्रयोग
 सोच समझकर करिये।

ऐसे शब्द का प्रयोग करिये... जिससे,
किसी की भावना को ठेस ना पहुँचे।

💟     💟     💟     💟

Draupadi and her revenge from duryodhan

The 18 day war,
 To the age of Draupadi
 It was like 80 years ...

  Physically too
 And mentally too

 Around the city
  The widows had a lot of ..

  The male was seen only

 Orphans were seen walking and,
 The queen of them all
  Draupadi
 In the palace of Hastinapur
  Sitting idle
 Was looking at the void.

 Only then
 "Sri Krishna"
 Enter the room

 Draupadi
 On seeing krishna
 They run and cling to them…
 Krishna rubs his head and lets him cry

 In a while,
 Separate him from himself
  They sit on the adjacent bed.

 Draupadi ": What has happened to this friend ??
 I did not think so.

 "Krishna": Destiny is very cruel Panchali ..
 She does not follow our way of thinking!

 Our actions
 Transforms into results ..

 You wanted to take revenge and, you succeeded, Draupadi!

 Your vengeance is complete ... not only Duryodhana and Dushasan,
 All kauravas are over

 You should be happy!

 "Draupadi": Sakha,
 You have come to bear my wounds or
 To sprinkle salt on them?

 "Krishna": No Draupadi,
 I have come to make you aware of the reality
 The result of our actions
  We are not able to see far and when they are in front .. then, nothing is in our hands.

 "Draupadi": So what,
 I am solely responsible for this war, Krishna?

 "Krishna": No Draupadi
 Don't consider yourself so important ...
 but,
 You have a little foresight in your actions
  So, I myself never get so much trouble.

 "Draupadi": What could I do, Krishna?

 "Krishna": - When you became a self-centered ...
 Then you do not humiliate Karna

 And to take part in the competition
 Gives an opportunity
 So, maybe the result
 There would have been some more!

 After this, when Kunti ordered you to be the wife of five husbands…
 Then you don't accept him
 Even then, the results would have been different.
              And
 After that
 You insulted Duryodhana in your palace ...
 she does not
 So, you don't rip off ...
 Even then, perhaps the circumstances would have been different.

 Also our "words"
 Draupadi is our "karma".

 And we
 Before uttering every word
 Weighing is very important…
  Otherwise,
 Not only his "side effects" ...
 They keep making their entire environment miserable.

 Man is the only creature in the world ...
  Whose
 "Poison"
 his
 Not in "teeth",
 "Words" has ...

 💟 💟 💟 💟
 
 So use words
  Do it thoughtfully.

 Use such a word ... that,
 Do not hurt anyone's feelings.

 💟 💟 💟 💟

Thursday, June 25, 2020

Amitabh Bachchan ने खोजा मास्‍क का हिन्‍दी शब्‍द: लेकिन, जरा बोलकर तो दिखाइए!

बिग बी ने ट्वीट कर बताया है कि उन्होंने अंत में 'मास्क' (Mask) के लिए एक हिंदी शब्द खोज लिया है.

 मेगास्टार अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan ) का केवल अभिनय ही नहीं बल्कि आवाज भी उतनी ही कमाल की है. उस पर उनकी हिन्‍दी भाषा पर गजब की कमांड, उच्‍चारण  और परफेक्‍शन भी किसी को भी प्रभावित करने के लिए काफी है. उनके ट्वीट की जानकारीपरक और मजेदार शैली ने भी लोगों को उनका कायल कर रखा है. 

उन्‍होंने एक और ऐसा ही ट्वीट किया जो तत्‍काल चर्चा में आ गया. 

बिग बी ने ट्वीट किया: T 3572 - ईएफ वीबी द्वारा बहुत मेहनत करने के बाद उन्होंने 'MASK' का हिंदी में अनुवाद किया: "नासिकामुखसंरक्षक कीटाणुरोधक वायुछानक वस्त्रादोरीकृतचित्तितिका!"


मास्‍क का हिन्‍दी शब्‍द बताते हुए सीनियर बच्‍चन ने अपनी एक फोटो भी पोस्‍ट की है, जिसमें वह फिल्‍म 'गुलाबो सिताबो' का मास्क पहने हुए दिखाई दे रहे हैं.

बता दें कि शूजीत सरकार की यह फिल्म कुछ दिन पहले ही अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई और प्रशंसकों ने बहुत सराहा है. मिर्जा के रोल में बिग बी का अभिनय बहुत ही जोरदार रहा. 


Tuesday, June 23, 2020

चीनी ऐप UC Browser को टक्कर देने के लिए बिहार के तीन युवाओं ने बनाया ‘मैगटैप’, जानें खासियत

पटना. चीन से झड़प और भारतीय जवानों के शहादत के बाद से ही भारत में एक बार फिर चीनी समान और ऐप्स के बहिष्कार करने की मांग उठने लगी है. ऐसे में बिहारी युवाओं द्वारा बनाया गया एक खास वेब ब्राउजर/ऐप चीनी ऐप्स को चुनैती दे रहा है. दरअसल बिहार के तीन युवाओं ने ‘मैगटैप’ (MagTapp) नामक वेब ब्राउज़र बनाया है जो इस केटेगरी के चाइनीज ऐप्स (यूसी ब्राउज़र) से कई मायनों में कहीं बेहतर साबित हो रहा है. इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘विजुअल डिक्शनरी’ है, जिससे बड़ी आसानी से किसी भी दूसरी भाषा के शब्द का अर्थ चित्र सहित अपनी भाषा में देखा-सुना जा सकता है.

10 लाख से अधिक यूजर

इसमें तीन चायनीज ऐप के अलग-अलग फीचर इस भारतीय ऐप के एक साथ मिल सकती है. ऐप के फाउंडर की माने तो गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्चिंग के कुछ दिनों में ही इसे 8 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और फिलहाल इसकी रेटिंग 4.5 है और इसके 10 लाख से ज्यादा यूजर हैं.


उम्मीद का दिया

🔸एक घर मे *पांच दिए* जल रहे थे। 🔸एक दिन पहले एक दिए ने कहा - इतना जलकर भी *मेरी रोशनी की* लोगो को *कोई कदर* नही है...तो बेहतर यही होगा कि ...